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पंचतत्व में विलीन हो गया सरला दीदी का पार्थिव शरीर, सैकड़ों लोागों ने दी श्रद्धांजलि

आबू रोड, 6 जून, निसं। ब्रह्माकुमारीज संस्थान गुजरात जोन की निदेशिका राजयेागिनी सरला दीदी का पार्थिक शरीर शुक्रवार को पंचतत्व में विलीन हो गया। उनका लम्बे बीमारी के बाद गुरूवार को अहमदाबाद में 12 बजकर 10 मिनटर पर अंतिम सांस ली थी। उनका पार्थिव शरीर शुक्रवार ब्रहकुमारीज संस्थान आबू रोड होते हुए माउण्ट आबू लाया गया। जहॉं रथ सजाकर उनकी यात्रा निकाली गयी। जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। पांडव भवन में चारों धामों की यात्रा कराते हुए नक्की झील के पास स्थित आध्यात्मिक म्यूजियम होते हुए शांतिवन लाया गया।

शांतिवन के तपस्या धाम में पार्थिव शरीर को रखा गया जहॉं ब्रह्माकुमारीज संस्थान की संयुक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी रतनमोहिनी, संस्था के महासचिव बीके निर्वेर, मीडिया प्रभाग के अध्यक्ष बीके करूणा, शांतिवन प्रबन्धक बीके भूपाल, कार्यक्रम प्रबन्धिका बीके मुन्नी, यूरोपियन सेवाकेन्द्रों की प्रभारी बीके जयन्ति, दक्षिण अफ्रीका से आयी बीके वेदान्ती, निरमा कम्पनी के चेयरमैन करसन भाई पटेल, राजकोट प्रभारी बीके भारती, गॉडलीवुड स्टूडियो के कार्यकारी निदेशक बीके हरीलाल, बीके भरत समेत कई संस्थान के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उनकी यात्रा में गुजरात से मेहसाना क्षेत्र की प्रभारी बीके सरला, अम्बावाड़ी की प्रभारी बीके शारदा, बीके अमर, महादेवनगर प्रभारी बीके चन्द्रिका समेत पूरे गुजरात के वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित थे।

इन्होनें ट्वीट कर जताया दुख: सरला दीदी के देहावसान पर देश के उपराष्ट्रपति वेकैय्या नायडू, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रिय मंत्री हर्षवर्धन, गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी, उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल, राज्यपाल ओपी कोहली ने दुख व्यक्त करते हुए लिखा है कि सरला दीदी का जीवन मानवता की सेवा के लिए समर्पित था। जिनका आशिर्वाद हमेशा मिलता रहा है।

पुष्पांजलि कर दी श्रद्धांजलि: गुजरात के उद्योगपति गौतम अडानी ने गुरूवार को अहमदाबाद में सरला दीदी के पार्थिव शरीर पर पुष्पा अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। वहीं निरमा कम्पनी के प्रबन्धक निदेशक करसन भाई पटेल, शिवानन्द आश्रम के अध्यक्ष आध्यात्मानन्द समेत अध्यात्म तथा प्रशासनिक अधिकारियों ने श्रद्धांजलि दी।

बहुमुखी प्रतिभा की धनी थी सरला दीदी: राजयोगिनी सरला दीदी एक अद्वितीय प्रतिभा की धनी थी। उनका जन्म 8 मार्च, 1940 में एक संभ्रात परिवार में कच्छ की जखाउ में हुआ था। लेकिन वे पली बढ़ी मुम्बई में क्योंकि माता पिता मुम्बई में ही रहते थे। वे मात्र 14 वर्ष की तरुण आयु में ही ब्रह्माकुमारीज संस्थान में आ गयी। क्योकि उनकी माता जी इस संस्थान से जुड़ी हुई थी।

प्रारम्भ में अपनी सगी बहन के साथ आध्यात्मिक मार्ग को चुन लिया तथा कभी पीछे मुडक़र नहीं देखा। वे मुम्बई और पुणे में वर्तमान संस्था प्रमुख राजयोगिनी दादी जानकी के साथ कुछ वर्षों तक ईश्वरीय सेवा करने के बाद प्रजापिता ब्रह्मा बाबा ने उन्हें पूरे गुजरात में ईश्वरीय सेवाओं के प्रचार प्रसार के लिए सन् 1967 में ज्ञान के शंखनाद की जिम्मेवारी दी। तब से लेकर अपनी अंतिम सांस तक गुजरात के लोगों में आध्यात्मिक ज्ञान और राजयोग से जीवन श्रेष्ठ बनाने का प्रयास करती रही। निरंतर और पवित्र प्रयासों और दृढ़ निश्चय के परिणामस्वरूप, आज वह गुजरात में 200 से अधिक केंद्रों और उप-केंद्रों की देखभाल करती है। वह सभी समर्पित भाइयों और बहनों को गहरी ममता प्रदान करती हैं, गुजरात में ब्रह्मा कुमारियों के हजारों अनुयायियों को उनसे गहरी प्रेरणा मिली है।